Hindi Motivation

Click here to edit subtitle

"रेखाओं का खेल ही है मुकद्दर, रेखाओं से मात खा रहे हो"

Click here 

बड़े-बुजुर्ग अकसर कहते हैं कि हमारी किस्मत हमारे हाथ में ही होती है। यह किस्मत हाथ की उन रेखाओं में भी समाई हुई है जो समय के साथ बदलती रहती हैं। हाथ की इन्हीं रेखाओं के अध्यन को हस्त रेखा (Hast R ekha) विज्ञान कहा जाता है। 

जीवन रेखा (Life Line) |

जीवन रेखा हृदय रेखा के ऊपरी भाग से शुरु होकर आमतौर पर मणिबन्ध पर जाकर समाप्त हो जाती है (Life line start from heart line and end on Manibandh line)। यह रेखा भाग्य रेखा के समानान्तर चलती है, परन्तु कुछ व्यक्तियो की हथेली में जीवन रेखा हृदय रेखा में से निकलकर भाग्य रेखा में किसी भी बिन्दु पर मिल जाती है।जीवन रेखा तभी उत्तम मानी जाती है यदि उसे कोइ अन्य रेखा न काट रही हो तथा वह लम्बी हो इसका अर्थ है कि व्यक्ति की आयु लम्बी होगी तथा अधिकतर जीवन सुखमय बीतेगा। रेखा छोटी तथा कटी होने पर आयु कम एंव जीवन संघर्षमय होगा(If there is breakage in life line or there is any cut it means your life is short and in struggle)।
भाग्य रेखा:(Fate Line)  |

हृदय रेखा के मध्य से शुरु होकर मणिबन्ध तक जाने वाली सीधी रेखा को भाग्य रेखा कहते हैं (Straight Line start from middle of heart and end on Manibandh line called fate line) ।  स्पष्ट रुप से दिखाई देने वाली रेखा उत्तम भाग्य का घौतक है।यदि भाग्य रेखा को कोइ अन्य रेखा न काटती हो तो भाग्य में किसी प्रकार की रुकावट नही आती।परन्तु यदि जिस बिन्दु पर रेखा भाग्य को काटती है तो उसी वर्ष व्यक्ति को भाग्य की हानि होती है। कुछ लोगो के हाथ में जीवन रेखा एंव भाग्य रेखा में से एक ही रेखा होती है।इस स्थिति में वह व्यक्ति आसाधारण होता है, या तो एकदम भाग्यहीन या फिर उच्चस्तर का भाग्यशाली होता है (If there is no fortune line on your palm it means you are not a middle class)। ऎसा व्यक्ति मध्यम स्तर का जीवन कभी नहीं जीता है।
हृदय रेखा: (Heart Line)  |

हथेली के मध्य में एक भाग से लेकर दूसरे भाग तक लेटी हुई रेखा को हृदय रेखा कहते हैं (Vertical line starts from middle of palm and end on heart line called heart line)।  यदि हृदय रेखा एकदम सीधी या थोडा सा घुमाव लेकर जाती है तो वह व्यक्ति को निष्कपट बनाती है। यदि हृदय रेखा लहराती हुई चलती है तो वह व्यक्ति हृदय से पीडित रहता है।यदि रेखा टूटी हुई हो या उस पर कोइ निशान हो तो व्यक्ति को हृदयाघात हो सकता है(There is Chance of heart attack if heart line is break)।
मस्तिष्क  रेखा:(Brain Line) |

 हथेली के एक छोर से दूसरे छोर तक उंगलियो के पर्वतो तथा हृदय रेखा के समानान्तर जाने वाली रेखा को मस्तिष्क रेखा  कहते हैं (Parallel line to heart line is called mind line)। यह आवश्यक नहीं कि मस्तिष्क रेखा एक छोर से दूसरे छोर तक (हथेली) जायें, यह बीच में ही किसी भी पर्वत (Planetary Mounts) की ओर मुड सकती है। यदि हृदय रेखा और मस्तिष्क रेखा आपस में न मिलें तो उत्तम रहता है (Brain line is good if mind line or heart line are not together)। स्पष्ट एंव बाधा रहित रेखा उत्तम मानी जाती है। कई बार मस्तिष्क रेखा एक छोर पर दो भागों में विभाजित हो जाती है। ऎसी रेखा वाला व्यक्ति स्थिर स्वभाव का नहीं होता है, सदा भ्रमित रहता है।
कनिष्ठिका अंगुली के पोरों का अध्ययन | Analysis of Phalanges in Little Finger

हर अंगुली का अपना अलग महत्व माना गया है. प्रत्येक अंगुली जीवन के किसी ना किसी एक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती है. आज हम कनिष्ठिका अंगुली के पोरो का अध्ययन करेगें. कनिष्ठिका को सबसे छोटी अंगुली कहा जाता है और अंग्रेजी में इसे लिटल फिंगर के नाम से जाना जाता है. अन्य सभी अंगुलियों से इसका अत्यधिक महत्व माना गया है. यह अंगुली व्यक्ति के बौद्धिक विकास की क्षमता बताती है. आइए इसके पोरों की विशेषताओं के बारे में जाने.  कनिष्ठिका अंगुली का पहला पोर | First Phalange in Little Finger आइए सबसे पहले कनिष्ठिका अंगुली के प्रथम पर्व के बारे में जानने का प्रयास करें. इस अंगुली का पहला पोर लंबा होने से व्यक्ति किसी भी कला के माध्यम से अपने मन के भाव प्रकट करता है. लेकिन यदि पहला पोर लंबा हो और यह अंगुली उच्च स्थिति में नहीं हो तब व्यक्ति वाकपटु नहीं होता है.   वाकपटुता के लिए इस अंगुली को हथेली में उच्च स्थिति में होना चाहिए. यह अंगुली निम्न स्थिति में है तो ऎसा व्यक्ति लेखो के माध्यम से अपनी बात कहता है. 


कनिष्ठिका अंगुली का दूसरा पोर | Second Phalange in Little Finger

कनिष्ठिका अंगुली के दूसरे पर्व की बात करते हैं. इस अंगुली का दूसरा पोर बड़ा होने पर व्यक्ति चिकित्सा जगत में निपुण होता है. चिकित्सा शास्त्र के क्षेत्र में व्यक्ति की योग्यता उभर कर आती है और वह अपनी पहचान बनाता है. इसके अतिरिक्त व्यक्ति ऎसी विद्याओं में कुशल होता है जो जीवन में व्यवहारिक रुप में काम आती हैं. जिनसे अन्य व्यक्ति लाभान्वित होते हैं.

कनिष्ठिका अंगुली का तीसरा पर्व | Third Phalange in Little Finger 

इस अंगुली के तीसरे पर्व की ओर बढ़ते हैं. इस अंगुली का तीसरा पोर लंबा होने पर व्यक्ति की बुद्धि व्यवसायिक होती है और व्यक्ति हर बात में बहुत ही व्यवहारिक होता है. व्यक्ति हर बात को नफे नुकसान के रुप में तौलकर देखता है और तब आगे बढ़ता है. व्यक्ति कुशाग्र बुद्धि का होता है तथा हर बात में निपुण व कुशल होता है.व्यक्ति अपनी बुद्धि चातुर्य के बल पर जीवन के सभी सुख प्राप्त करता है.

कनिष्ठिका का सिरा | Top End of Little Finger  

कनिष्ठिका अंगुली के सिरे की बात करते हैं क्योकि इस अंगुली का पहला सिरा भी बहुत महत्व रखता है. कनिष्ठिका पहला सिरा गोल होने पर व्यक्ति हाजिरजवाब होता है. पहला सिरा नुकीला होने पर व्यक्ति में चतुरता के साथ उसके कार्यों में कलात्मकता का भी भाव होता है. पहला सिरा चौकोर होने पर व्यक्ति की बुद्धि में व्यवहारिकता बढ़ जाती है. हर काम को व्यवहारिकता की कसौटी पर परखते हुए करता है. यह सिरा मूसलाकार होने से व्यक्ति सिविल इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्र में कुशल होता है.


कनिष्ठिका के संबंध में अन्य उपयोगी बातें | Other Important Information about Little Finger 


अंत में इस अंगुली के बारे में कुछ अन्य बातें जानने का प्रयास करते हैं. अधिकतर सभी हाथों में सामान्य कनिष्ठिका अंगुली अन्य अंगुलियों की तुलना में पतली होती है.यदि यह अंगुली अन्य अंगुलियों की तुलना में मोटी होती है तब व्यक्ति में काम भाव अधिक मात्रा में होता है. इस अंगुली के मोटा होने के साथ यदि शुक्र पर्वत व आक्रामक मंगल भी बली है तब व्यक्ति अपनी काम पूर्ति के लिए सामाजिक नियमों की परवाह भी नहीं करता है. इस अंगुली के मुड़ा-तुड़ा होने पर व्यक्ति अपने कार्यों की सिद्धि के लिए छल तथा प्रपंच करने वाला होता है. कनिष्ठिका अंगुली हथेली में सामान्यत: निम्न स्थिति में होती है. यदि यह निम्न स्थिति में है तब ऎसा व्यक्ति दूसरों की बातों में जल्दी आता है.निम्न स्थिति वाला व्यक्ति अपनी बात मनवाने की कला ही नहीं जानता है कि कैसे अपनी बात को मनवाया जाता है. यदि कनिष्ठिका हथेली में उच्च स्थिति में हो तब व्यक्ति में अकड़ बहुत होती है.